Sunday, 2 September 2018

बड़ा इमामबाड़ा: सुन्दर संरचना

    लखनऊ स्थित बड़ा इमामबाड़ा को कला एवं रहस्य की दुनिया का सुन्दर आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित बड़ा इमामबाड़ा को भूल-भुलैया भी कहते हैं। इस पौराणिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण आसफउद्दौला ने वर्ष 1784 में कराया था। बड़ा इमामबाड़ा की कलात्मकता देखते ही बनती है। यूं कहें कि इसकी कलात्मकता का कहीं कोई जोड़ नहीं।

   विशेषज्ञों की मानें तो आसफउद्दौला ने इस दिव्य-भव्य इमारत का निर्माण अकाल राहत परियोजना के तहत कराया था। इस बेशकीमती इमारत को बनाने में भी बेशकीमती खर्च किया गया था। इसका विशाल गुम्बदनुमा हाल करीब 50 मीटर लम्बा एवं करीब 15 मीटर चौड़ा है। इसे बनाने में उस जमाने में करीब 10 लाख रुपए की धनराशि खर्च की गयी थी।

   विशेषज्ञों की मानें तो नवाब वंशज इस बेशकीमती इमारत की साज सज्जा पर सालाना 5 लाख रुपए या इससे अधिक धनराशि खर्च करते थे। खास यह कि इस बड़ा इमामबाड़ा में एक असफी मस्जिद भी है। 

   हालांकि गैर मुस्लिम को इस मस्जिद में प्रवेश की इजाजत नहीं है। मस्जिद के परिसर आंगन में दो ऊंची मीनारें हैं। दिव्यता-भव्यता एवं कलात्मकता के कारण बड़ा इमामबाड़ा को विश्व में ख्याति हासिल है। इस विश्व प्रसिद्ध इमारत में भूल-भुलैया भी है। इस भूल-भुलैया में एक गहरा कुंआ भी है।
  भूल-भुलैया में बिना गाइड नहीं जाना चाहिए। कारण रास्ता भूलने की प्रबल संभावना रहती है। लखनऊ को वस्तुत: नवाबों का शहर कहा जाता है। नवाबों ने ही इस खूबसूरत संरचना को अस्तित्व दिया था। जिसने देश विदेश में शिखर की ख्याति हासिल की है। बड़ा इमामबाड़ा मुगल-इस्लामिक वास्तुकला को प्रदर्शित करता है। 

   इमारत की शानदार एवं सुन्दर नक्काशी देख कर पर्यटक दंग रह जाते हैं। इसके वास्तुशिल्पी किफायतउल्लाह थे। किफायतउल्लाह ताजमहल के शिल्पकार के निकटतम संबंधी थे। विशेषज्ञों की मानें तो इस इमारत का निर्माण इस लिए किया गया था कि बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। 

   बड़ा इमामबाड़ा एक अजीब कलाकृति है। यह कलाकृति सम्मोहित करने की क्षमता रखती है। दिलचस्प यह कि कक्षों के निर्माण में साफ तौर से इस्लामिक प्रभाव दिखता है। इमामबाड़ा वस्तुत: एक विहंगम आंगन की भांति है। इसके आगे एक विशाल हाल है। खास यह कि करीब 15 मीटर ऊंचाई वाले हाल में कोई स्तम्भ नहीं है। 

   यह विशाल हाल लकड़ी, लोहा एवं पत्थर की बीम से बना है। बिना किसी सहारे के खड़ी विश्व की यह सबसे बड़ी संरचना है। इस विशाल बड़ा इमामबाड़ा में तीन विशाल कक्ष हैं। इनकी दीवारों के मध्य लम्बे-चौड़े गलियारे हैं। यह गलियारे करीब 20 फुट चौड़े हैं। यह घनी एवं गहरी संरचना ही भूल-भुलैया कहलाती है। खास यह कि यहां 1000 से अधिक छोटे-छोटे रास्ते हैं। सामान्यत: यह सभी रास्ते एक जैसे दिखते हैं।

    लिहाजा पर्यटक इन रास्तों में भूल जाते हैं कि किधर जाना है। हालांकि यह सभी रास्ते अलग-अलग निकलते हैं। भूल-भुलैया की बावड़ी अर्थात कुंआ भी अति सुन्दर है। सीढ़ीदार कुंआ भी पूर्व नवाबी युग की धरोहर है।
   विशेषज्ञों की मानें तो शाही हमाम नामक यह बावड़ी गोमती नदी से ताल्लुक रखती है। विलक्षणता के कारण बड़ा इमामबाड़ा की दर्शनीयता के लिए देश विदेश के पर्यटकों का आना जाना निरन्तर लगा रहता है।
    बड़ा इमामबाड़ा की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अमौसी लखनऊ है। निकटतम रेलवे स्टेशन लखनऊ जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी बड़ा इमामबाड़ा की यात्रा कर सकते हैं।
26.842680,80.925941

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