नालन्दा महाविहार: बौद्ध धर्म की धरोहर
नालन्दा महाविहार को बिहार का श्रेष्ठतम पर्यटन केन्द्र कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, बिहार का नालन्दा महाविहार अपने प्राचीन इतिहास के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
बिहार शरीफ जिला स्थित नालन्दा विश्वविद्यालय वैश्विक धरोहर की श्रेणी में गिना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो नालन्दा विश्वविद्यालय दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। दुनिया के असंख्य देशों से छात्र अध्ययन के लिए नालन्दा आते थे। खास यह कि नालन्दा विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी मौजूद हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो 14 हेक्टेयर क्षेत्रफल में नालन्दा विश्वविद्यालय के अवशेष मिले थे। नालन्दा विश्वविद्यालय की सभी इमारतों का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से किया गया था।
विश्वविद्यालय परिसर दक्षिण-उत्तर दिशा की ओर निर्मित है। मठ एवं विहार पूर्व दिशा में अवस्थित हैं। परिसर की मुख्य इमारत में बिहार 1 थी। वर्तमान में यहां दोमंजिला इमारत निर्मित है।
विलक्षणताओं एवं विशेषताओं के कारण नालन्दा विश्वविद्यालय को यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। भगवान गौतम बुद्ध एवं भगवान महावीर कई बार नालन्दा विश्वविद्यालय में ठहरे थे।
विशेषज्ञों की मानें तो भगवान महावीर ने मोक्ष की प्राप्ति नालन्दा स्थित पावापुरी में की थी। खास यह कि नालन्दा विश्वविद्यालय को नालन्दा महाविहार भी कहा जाता है। परिसर में विश्वविद्यालय के अवशेष, संग्रहालय, नव नालन्दा महाबिहार, ह्वेनसांग मेमोरियल हाल दर्शनीय है।
नालन्दा महाविहार एवं आसपास दर्शनीय एवं पर्यटन स्थलों की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से राजगीर, पावापुरी, गया एवं बोध गया आदि इत्यादि हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो नालन्दा विश्वविद्यालय अर्थात नालन्दा महाविहार के अवशेष की खोज अलेक्जेंडर कर्निघंम ने की थी। पांचवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक इसे बौद्ध शिक्षा केन्द्र के तौर पर वैश्विक स्तर पर जाना-पहचाना जाता था।
दुनिया के इस पहले आवासीय अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में 10000 से अधिक छात्र यहां रह कर शिक्षा ग्रहण करते थे। दुनिया की कई नामचीन हस्तियो ने नालन्दा में रह कर शिक्षा हासिल की थी। विशेष यह कि 2000 से अधिक शिक्षक यहां रह कर छात्रों को शिक्षा देते थे।
यहां आने वाले बौद्ध यात्रियों की संख्या भी अच्छी रहती थी। गुप्त राजवंश ने प्राचीन कुषाण वास्तुशैली के इन मठ एवं अन्य सम्पदाओं को अपेक्षित संरक्षण दिया था।
सम्राट अशोक एवं हर्षवर्धन ने नालन्दा महाविहार में सबसे अधिक मठ, विहार एवं मंदिरों का निर्माण कराया था। पुरातात्विक विभाग के द्वारा यहां की गयी खुदाई से पुरातात्विक संरचनाओं की जानकारी मिलती है।
करीब 800 वर्षों तक नालन्दा ज्ञान का क्षेत्र रहा। वैदिक शिक्षा के लिए नालन्दा विश्व में जाना पहचाना गया। छठ पूजा के लिए प्रसिद्ध सूर्य मंदिर भी यहां से कुछ दूर पर स्थित है।
नालन्दा पुरातात्विक संग्रहालय: नालन्दा पुरातात्विक संग्रहालय विश्वविद्यालय परिसर की विपरीत दिशा में स्थित है। इस संग्रहालय में खुदाई से प्राप्त अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है।
इसमें भगवान गौतम बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं, आकार-प्रकार की मूर्तियों का अच्छा एवं समृद्ध संग्रह है। बुद्ध की टेराकोटा मूर्तियों बेहतरीन संग्रह है। संग्रहालय में तांबे की प्लेट, पत्थर पर अंकित अभिलेख, प्राचीन सिक्के, बर्तन एवं अन्य बहुत कुछ प्रदर्शित है।
नव नालन्दा महाविहार: नव नालन्दा महाविहार एक शिक्षा संस्थान है। इसमें पाली साहित्य, बौद्ध धर्म की शिक्षा एवं अनुसंधान होता है। हालांकि यह एक नया शिक्षा संस्थान है। फिर भी इसकी ख्याति वैश्विक स्तर पर है। खास यह है कि विदेशों के छात्र यहां शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
ह्वेनसांग मेमोरियल हाल: ह्वेनसांग मेमोरियल हाल एक नव निर्मित भवन है। इस भवन का निर्माण चीन के विख्यात यात्री ह्वेनसांग की स्मृति में किया गया है। इसमें ह्वेनसांग से संबंधित वस्तुओं का प्रदर्शन एवं उनकी मूर्ति स्थापित है।
ह्वेनसांग मेमोरियल हाल: ह्वेनसांग मेमोरियल हाल एक नव निर्मित भवन है। इस भवन का निर्माण चीन के विख्यात यात्री ह्वेनसांग की स्मृति में किया गया है। इसमें ह्वेनसांग से संबंधित वस्तुओं का प्रदर्शन एवं उनकी मूर्ति स्थापित है।
सिलाव: सिलाव नालन्दा एवं राजगीर के मध्य स्थित है। सिलाव की मिठाई खाजा देश दुनिया में विशेष तौर पर प्रसिद्ध है। पर्यटक सिलाव में खाजा का स्वाद ले सकते हैं।
सूरजपुर बड़गांव: सूरजपुर बड़गांव में भगवान सूर्य का अति प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। यहां एक भव्य-दिव्य झील भी है। यहां छठ का उत्सव खास तौर से मनाया जाता है।
सूरजपुर बड़गांव: सूरजपुर बड़गांव में भगवान सूर्य का अति प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। यहां एक भव्य-दिव्य झील भी है। यहां छठ का उत्सव खास तौर से मनाया जाता है।
नालन्दा महाविहार की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट पटना है। पटना एयरपोर्ट से नालन्दा की दूरी करीब 89 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन नालन्दा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नालन्दा महाविहार की यात्रा कर सकते हैं।
25.199700,85.510040
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