Tuesday, 19 June 2018

आमेर दुर्ग : राजपूताना शैली का वास्तुशिल्प

  आमेर दुर्ग को वास्तुशिल्प का इन्द्रधनुषी आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। कलात्मक आयाम लिये यह दुर्ग अपनी खास शैली एवं सुन्दरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 

    राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर क्षेत्र की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित आमेर दुर्ग देश दुनिया के पर्यटकों की खास पसंद है। दुर्ग या महल की खास कलात्मक एवं विशुद्ध हिन्दू वास्तु शैली पर्यटकों को आकर्षित करती है। 
  खास तौर से राजपूताना शैली का वास्तुशिल्प आकर्षित करता है। कालांतर में इस क्षेत्र में कछवाह राजपूत मान सिंह प्रथम ने राज किया था। लाल बलुआ पत्थरों एवं संगमरमर से बना यह किला भव्य दुर्ग पहाड़ी का आकर्षण है।

      इस दुर्ग में दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, शीश महल, जय मंदिर एवं सुख निवास आदि हैं। सुख निवास जलधाराओं की शीतलता से बेहद आनन्ददायक रहता है।
    यह महल कछवाह राजपूत महाराजाओं एवं उनके परिवार का निवास हुआ करता था। मुख्य द्वार के निकट आराध्या चैतंय पंथ की देवी का मंदिर है। दुर्ग में एक सुरंग मार्ग भी है। आमेर दुर्ग अरावली पर्वतमाला के एक चील आकार के पर्वत पर बना है।

    मुख्यत: यह महल चार हिस्सों में है। इन चार हिस्सों में प्रत्येक के प्रवेश द्वार एवं प्रांगण हैं। जलेब चौक प्रथम प्रांगण है। प्रांगण में युद्ध विजय हासिल करने वाली सेना का जुलूस निकलता था। यह विजय जुलूस राजसी परिवार की महिलायें भी झरोखों से देखती थीं।
    इसी प्रांगण के बगल में अस्तबल एवं सैनिकों के आवास थे। गणेश पोल द्वार से एक शानदार रास्ता राजमहल की ओर जाता है।
   शिला देवी मंदिर : शिला देवी मंदिर राजपूताना परिवार की आराध्य देवी हैं। खास यह है कि शिला देवी मंदिर का प्रवेश द्वार चांदी के आवरण से अच्छादित है। निकट ही शिरोमणि का वैष्णव मंदिर है। इस मंदिर का तोरण संगमरमर का बना है।

    जादुई पुष्प : जादुई पुष्प यहां के मुख्य आकर्षण में से एक है। शीशमहल के स्तम्भों में संगमरमर से फूलों की आकृतियां उकेरी गयीं हैं। विशेष आकर्षण में तितली के जोड़े, कमल, नाग का फन, हाथी की सूंड, सिंह की पूंछ आदि हैं। खास यह कि यह इलाका कलात्मकता का सुन्दर आयाम है।
   चौक बारादरी : चौक बारादरी महल का पुरातन हिस्सा है। विशेषज्ञों की मानें तो इस महल को बनाने में 25 वर्ष का समय लगा था। महल अलंकरण, भित्ति चित्रों एवं रंगीन टाइल्स से सुसज्जित है। इस महल का निकास मार्ग आमेर शहर को भी जाता है। यह रास्ता शहर के विभिन्न मंदिरों को हवेलियों एवं कोठियों की ओर खुलता है।
    उद्यान : उद्यान खास तौर से तीसरे प्रांगण क्षेत्र में स्थित है। उद्यान के निकट ही एक ऊंचे चबूतरा पर जय मंदिर है। इसी के पश्चिम में सुख निवास है। इसका निर्माण राजा जय सिंह ने कराया था। इनकी शैली मुगल उद्यानों की चारबाग शैली की भांति है। सितारों के आकार के जलाशय हैं। इनमें सुन्दर फव्वारों की श्रंखला है। संगमरमर की सुन्दर सजावट आकर्षक बना देती है।
       त्रिपोलिया द्वार : त्रिपोलिया द्वार तीन दरवाजों वाला स्थान है। त्रिपोलिया द्वार की खासियत यह है कि यह तीन ओर खुलता है। इसका एक द्वार जलेब चौक को खुलता है। एक द्वार मान सिंह महल की ओर खुलता है। एक द्वार राजसी महल की ओर खुलता है।
     विश्व धरोहर : विश्व धरोहर में किला को शामिल किया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो राजस्थान सरकार ने वर्ष 2011 में आमेर दुर्ग को विश्व धरोहर में शामिल करने के लिए यूनेस्को को प्रस्ताव भेजा था। वर्ष 2013 में आमेर दुर्ग को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया गया।
     आमेर दुर्ग की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जयपुर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जयपुर है। इसके अलावा पर्यटक सड़क मार्ग से भी आमेर दुर्ग की यात्रा कर सकते हैं।
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