महाबलीपुरम : स्थापत्य कला का अनुपम सौन्दर्य
महाबलीपुरम को मंदिरों का शहर कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। या फिर इसे स्थापत्य कला एवं सौन्दर्य शास्त्र की गाथा कहें। कुछ भी हो तमिलनाडु का शहर महाबलीपुरम चहुंओर कलात्मकता से परिपूरित है। भव्यता-दिव्यता का कहीं कोई जोड़ नहीं।
जी हां, महाबलीपुरम में धर्म-आध्यात्म, स्थापत्य कला-वास्तुशिल्प एवं कला के विविध आयाम निरूपित हैं। शायद यही कारण है कि महाबलीपुरम देश दुनिया के पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है।
महाबलीपुरम को मामल्लापुरम भी कहते हैं। खास यह है कि सागर तट की सुन्दरता महाबलीपुरम में चार चांद लगा देती है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित महाबलीपुरम बंगाल की खाड़ी के तट पर है। सातवीं शताब्दी का यह शहर कभी पल्लव राजाओं की राजधानी था।
विशेषज्ञों की मानें तो यह शहर द्रविड़ वास्तुकला की दृष्टि से श्रेष्ठ रहा है। महाबलीपुरम एवं उसके आसपास आकर्षक स्थलों की बड़ी श्रंखला है। इनमें खास तौर से अर्जुंस पेनेंस, शोर टेम्पल, पाण्डव रथ, कृष्ण मण्डपम, गुफायें, मूर्ति संग्रहालय, मुट्टुकाडु, कोवलोंग आदि हैं।
अर्जुंस पेनेंस : अर्जुंस पेनेंस शानदार नक्काशी के लिए ख्याति रखता है। यह स्थान 27 मीटर लम्बा एवं 9 मीटर चौड़ा है। यह व्हेल मछली के आकार का एक विशाल शिलाखण्ड है। इस शिलाखण्ड पर मनुष्य, पशु-पक्षियों सहित विभिन्न प्रकार की आकृतियां रूपांकित हैं। इसे देश का शानदार शिलाखण्ड होने का गौरब हासिल है।
शोर टेम्पल : शोर टेम्पल को दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में श्रेष्ठतम माना जाता है। यह मंदिर महाबलीपुरम के तट पर स्थित है। आठवीं शताब्दी का यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है। खास यह कि यहां दो शिव मंदिर हैं। मध्य में भगवान विष्णु का मंदिर है। सागर की लहरें मंदिर तक टकराती हैं। सागर की लहरों को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे लहरें प्रभु के चरण पखारने का उपक्रम है।
पाण्डव रथ : पाण्डव रथ महाबलीपुरम का मुख्य स्थल है। यह स्थान शहर के दक्षिणी इलाका में स्थित है। आकार प्रकार को देख कर इसे पंच पाण्डव रथ कहा जाता है। खास यह है कि पांच में से चार रथों को एक विशाल चट्टान पर रूपांकित किया गया है। इनमें द्रोपदी अर्जुन रथ वर्गाकार है। धर्मराज रथ सबसे ऊंचा है।
कृष्ण मण्डपम : कृष्ण मण्डपम महाबलीपुरम का एक शानदार मंदिर है। शिलाखण्ड काट कर भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर की दर-ओ-दीवर पर ग्रामीण हलचल का अंकन है। श्री कृष्ण जी का भी अंकन किया गया है। जिसमें वह गोवर्धन पर्वत को उंगली पर धारण किये हुये हैं।
क्रोकोडाइल बैंक : क्रोकोडाइल बैंक की भी अपनी एक अलग मान्यता है। महाबलीपुरम से करीब 14 किलोमीटर दूर चेन्नई रोड पर स्थित है। विशेषज्ञों की मानें तो इसे 1976 में अमेरिका के रोमुलस विटेकर ने स्थापित किया था। स्थापना के डेढ़ दशक की अवधि में क्रोकोडाइल की संख्या डेढ़ हजार से अधिक हो गयी। प्रारम्भ में इसमें 15 क्रोकोडाइल थे। निकट ही सांपों का फार्म भी है।
वाराह गुफायें : वाराह गुफायें खास तौर से भगवान वाराह अवतार को रेखांकित करती हैं। यह गुफायें भगवान विष्णु के वाराह एवं वामन अवतार को समर्पित हैं। सातवीं शताब्दी की महिसासुर मर्दिनी गुफा भी नक्काशी के लिए खास प्रख्यात है।
मूर्ति संग्रहालय : मूर्ति संग्रहालय में स्थानीय कलाकारों की 3000 से अधिक संरचनायें संग्रहित हैं। इनमें खास तौर से मूर्ति शिल्प दर्शनीय हैं। संग्रहालय में प्रदर्शित मूर्तियां लकड़ी, पीतल एवं कंक्रीट की है।
कोवलोंग : कोवलोंग महाबलीपुरम से करीब 19 किलोमीटर दूर खूबसूरत स्थान है। मुख्यत: यह किला का अवशेष स्थल है। किला का अवशेष स्थल होने के बावजूद सुन्दरता भी अद्वितीय है। पर्यटक यहां तैराकी, नौकायन, जलक्रीड़ा का शौक पूरा कर सकते हैं।
नृत्य पर्व : नृत्य पर्व महाबलीपुरम का मुख्य पर्व है। सामान्यत: यह नृत्य पर्व जनवरी-फरवरी माह में आयोजित किया जाता है। देश के शीर्षस्थ कलाकार शोर मंदिर परिसर में कला का शानदार प्रदर्शन करते हैं। वाद्ययंत्रो का कर्णप्रिय संगीत एवं समुद्र की लहरों का प्राकृतिक संगीत मदहोश करने वाला होता है। श्रोता-दर्शन नृत्य-संगीत के इस आयोजन में सुधबुध खो देते है।
अर्जुंस पेनेंस : अर्जुंस पेनेंस शानदार नक्काशी के लिए ख्याति रखता है। यह स्थान 27 मीटर लम्बा एवं 9 मीटर चौड़ा है। यह व्हेल मछली के आकार का एक विशाल शिलाखण्ड है। इस शिलाखण्ड पर मनुष्य, पशु-पक्षियों सहित विभिन्न प्रकार की आकृतियां रूपांकित हैं। इसे देश का शानदार शिलाखण्ड होने का गौरब हासिल है।
शोर टेम्पल : शोर टेम्पल को दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में श्रेष्ठतम माना जाता है। यह मंदिर महाबलीपुरम के तट पर स्थित है। आठवीं शताब्दी का यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का शानदार उदाहरण माना जाता है। खास यह कि यहां दो शिव मंदिर हैं। मध्य में भगवान विष्णु का मंदिर है। सागर की लहरें मंदिर तक टकराती हैं। सागर की लहरों को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे लहरें प्रभु के चरण पखारने का उपक्रम है।
पाण्डव रथ : पाण्डव रथ महाबलीपुरम का मुख्य स्थल है। यह स्थान शहर के दक्षिणी इलाका में स्थित है। आकार प्रकार को देख कर इसे पंच पाण्डव रथ कहा जाता है। खास यह है कि पांच में से चार रथों को एक विशाल चट्टान पर रूपांकित किया गया है। इनमें द्रोपदी अर्जुन रथ वर्गाकार है। धर्मराज रथ सबसे ऊंचा है।
कृष्ण मण्डपम : कृष्ण मण्डपम महाबलीपुरम का एक शानदार मंदिर है। शिलाखण्ड काट कर भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर की दर-ओ-दीवर पर ग्रामीण हलचल का अंकन है। श्री कृष्ण जी का भी अंकन किया गया है। जिसमें वह गोवर्धन पर्वत को उंगली पर धारण किये हुये हैं।
क्रोकोडाइल बैंक : क्रोकोडाइल बैंक की भी अपनी एक अलग मान्यता है। महाबलीपुरम से करीब 14 किलोमीटर दूर चेन्नई रोड पर स्थित है। विशेषज्ञों की मानें तो इसे 1976 में अमेरिका के रोमुलस विटेकर ने स्थापित किया था। स्थापना के डेढ़ दशक की अवधि में क्रोकोडाइल की संख्या डेढ़ हजार से अधिक हो गयी। प्रारम्भ में इसमें 15 क्रोकोडाइल थे। निकट ही सांपों का फार्म भी है।
वाराह गुफायें : वाराह गुफायें खास तौर से भगवान वाराह अवतार को रेखांकित करती हैं। यह गुफायें भगवान विष्णु के वाराह एवं वामन अवतार को समर्पित हैं। सातवीं शताब्दी की महिसासुर मर्दिनी गुफा भी नक्काशी के लिए खास प्रख्यात है।
मूर्ति संग्रहालय : मूर्ति संग्रहालय में स्थानीय कलाकारों की 3000 से अधिक संरचनायें संग्रहित हैं। इनमें खास तौर से मूर्ति शिल्प दर्शनीय हैं। संग्रहालय में प्रदर्शित मूर्तियां लकड़ी, पीतल एवं कंक्रीट की है।
कोवलोंग : कोवलोंग महाबलीपुरम से करीब 19 किलोमीटर दूर खूबसूरत स्थान है। मुख्यत: यह किला का अवशेष स्थल है। किला का अवशेष स्थल होने के बावजूद सुन्दरता भी अद्वितीय है। पर्यटक यहां तैराकी, नौकायन, जलक्रीड़ा का शौक पूरा कर सकते हैं।
नृत्य पर्व : नृत्य पर्व महाबलीपुरम का मुख्य पर्व है। सामान्यत: यह नृत्य पर्व जनवरी-फरवरी माह में आयोजित किया जाता है। देश के शीर्षस्थ कलाकार शोर मंदिर परिसर में कला का शानदार प्रदर्शन करते हैं। वाद्ययंत्रो का कर्णप्रिय संगीत एवं समुद्र की लहरों का प्राकृतिक संगीत मदहोश करने वाला होता है। श्रोता-दर्शन नृत्य-संगीत के इस आयोजन में सुधबुध खो देते है।
महाबलीपुरम की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चेन्नई है। चेन्नई एयरपोर्ट से महाबलीपुरम की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन चेंगलपट्टू है। चेंगलपट्टू रेलवे स्टेशन से महाबलीपुर की दूरी करीब 29 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से भी महाबलीपुरम की यात्रा की जा सकती है।
12.626927,80.192711
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