Sunday, 3 November 2019

कन्याकुमारी: अद्भुत एवं विलक्षण सौन्दर्य

   कन्याकुमारी को प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत एवं विलक्षण प्रतिमान कहा जाना जाहिए। हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर के अद्भुत संगम पर स्थित कन्याकुमारी एक शानदार पर्यटन है। 

   भारत के तमिलनाडु के सुदूर तट पर दक्षिण में स्थित कन्याकुमारी एक अद्भुुत शहर है। कला, संस्कृति एवं सभ्यता का अद्भुत संगम कन्याकुमारी भारत के दक्षिण का अति दर्शनीय शहर है। इसे भारत के पर्यटन का ताज माना जाता है।

   विशिष्टता के कारण ही कन्याकुमारी वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। समुद्र के विशाल तटों एवं भव्य लहरों के बीच रचा-बसा कन्याकुमारी की निराली छटा पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। कन्याकुमारी का सूर्यास्त एवं सूर्योदय अति दर्शनीय होता है। समुद्र तटों की रंग-बिरंगी रेत कन्याकुमारी के सौन्दर्य में चार चांद लगा देती है।

  दक्षिण भारत के इस शहर का कन्याकुमारी नामकरण होने का भी एक पौराणिक कथानक है। मान्यता है कि प्राचीनकाल में राजा भरत की आठ पुत्रियों एवं एक पुत्र का राजवंश था।
   राजा भरत ने सभी पुत्रियों एवं पुत्र को साम्राज्य यथोचित बटवारा कर दिया। राजा भरत की पुत्री कुमारी को दक्षिण भारत का यह स्थान मिला था। कुमारी को शक्ति का अवतार माना जाता था। शक्ति के अवतार कुमारी की इच्छा थी कि भगवान शिव से विवाह करें। 

   पूजन-अर्चन से भगवान शिव प्रसन्न हो गये। इतना ही नहीं, भगवान शिव कुमारी से विवाह के लिए सहमत हो गये। मान्यता है कि नारद मुनि के हस्तक्षेप के कारण कुमारी एवं शिव का विवाह नहीं हो सका। नारद चाहते थे कि राक्षस राज बाणासुर का वध कुमारी के हाथों हो।

   अंतोगत्वा बाणासुर का वध कुमारी के हाथों हुआ। कुमारी की याद में दक्षिण भारत के इस स्थान को कन्याकुमारी के नाम से जाना पहचाना जाता है। दक्षिण भारत का यह शहर प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण अति दर्शनीय है। कन्याकुमारी में दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।

   इनमें खास तौर से कन्याकुमारी अम्मन मंदिर, गांधी स्मारक, तिरुवल्लुवर मंदिर, विवेकानन्द रॉक मेमोरियल, सुचिन्द्रम, नागराज मंदिर, पद्मानभापुरम महल, कोरटालम झरना एवं तिरुचेन्दुर एवं उदयगिरी किला आदि इत्यादि हैं। 
   कन्याकुमारी अम्मन मंदिर: कन्याकुमारी अम्मन मंदिर सागर केे मुहाने पर स्थित एक छोटा किन्तु शानदार मंदिर है। यह मंंदिर वस्तुत: पार्वती देवी को समर्पित है। मंदिर समुद्र के संगम पर स्थित है। 
   हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर के संगम पर स्थित यह मंदिर अति दर्शनीय है। प्रकृति की निराली छटा मंत्रमुग्ध कर लेती है। सागर की लहरें की किसी सुमधुर संगीत की भांति पर्यटकों को प्रफुल्लित करती हैं। श्रद्धालुु इस त्रिवेणी मेें स्नान करने के उपरांत मंदिर में प्रवेश करते हैं। 
   गांधी स्मारक: गांधी स्मारक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित है। मान्यता है कि महात्मा गांधी की चिता की राख इस स्मारक में रखी है। इस स्मारक की स्थापना 1956 में हुई थी। महात्मा गांधी 1937 में यहां आये थे। महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद 1948 में कन्याकुमारी में उनकी अस्थियां विसर्जित की गयी थीं। 

   स्मारक को अद्भुत ढ़ंग से डिजाइन किया गया है। जिससे महात्मा गांधी के जन्म दिन पर सूर्य की प्रथम किरण उस स्थान पर पड़ती हैं।
   तिरुवल्लुवर मूर्ति: तिरुवल्लुवर मूर्ति पर्यटक को बेहत आकर्षित करती है। करीब 133 फुट ऊंची प्रतिमा अति दर्शनीय है। विशेषज्ञों की इस शानदार प्रतिमा की संरचना में पत्थर के 1283 टुकड़ों का उपयोग किया गया था। 
   विवेकानन्द रॉक मेमोरियल: विवेकानन्द रॉक मेमोरियल की स्थापना स्वामी विवेकानन्द के सम्मान में संरचित किया गया था। समुद्र तट पर स्थित इस भव्य दिव्य संरचना स्थल पर स्वामी विवेकानन्द ने ध्यान लगाया था।
   इस स्थान को श्रीपद पराई के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। प्राचीन मान्यता है कि कन्याकुमारी ने भी इस स्थान पर तपस्या की थी। यहां कन्याकुमारी के पद चिह्न अंकित हैं। यह स्मारक वैश्विक ख्याति रखता है। 

   सुचिन्द्रम: सुचिन्द्रम वस्तुत: कन्याकुमारी का एक छोटा सा गांव है। कन्याकुमारी से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित यह गांंव थानुमलायन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति बेहद आकर्षक है।
   करीब 6 मीटर ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा का अपना एक अलग ही आकर्षण है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में ब्राह्मा, महेश, विष्णु की दिव्य भव्य प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठापित हैं। 
   नागराज मंदिर: नागराज मंदिर कन्याकुमारी से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। नागराज मंदिर नागदेव को समर्पित है। यहां भगवान विष्णु एवं भगवान शिव के दो अन्य मंदिर भी हैं। इस मंदिर का मुख्य द्वार चीन के बुद्ध विहार की स्थापत्य कला को दर्शाता है।
   कोरटालम झरना: कोरटालम झरना एक आदर्श पिकनिक स्पॉट है। करीब 167 मीटर ऊंचाई से गिरने वाले इस दर्शनीय झरना का अपना एक अलग सौन्दर्य है। इस झरना का जल आैषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। कन्याकुमारी से करीब 137 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना पर्यटकों के खास आकर्षण का केन्द्र रहता है।
    कन्याकुमारी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से कन्याकुमारी की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कन्याकुमारी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कन्याकुमारी की यात्रा कर सकते हैं।
8.093300,77.549090

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