Thursday, 12 September 2019

पांगोंग त्सो झील : अद्भुत सौन्दर्य

    पांगोंग त्सो झील की प्राकृतिक सुन्दरता किसी जादुई करिश्मा से कम नहींं। हिमालय की इस शानदार झील को वस्तुत: एक पौराणिक एवं धरोहर माना जाता है। 

    भारत के केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख की यह झील अद्भुत एवं विलक्षण है। समुद्र तल से करीब 4500 मीटर ऊंचाई पर स्थित पांगोंग त्सो झील भारत-चीन की सीमा पर स्थित है। इस शानदार झील का एक बड़ा हिस्सा चीन सीमा क्षेत्र में है। इसकी चौड़ाई करीब 8 किलोमीटर है। खारा जल की इस विलक्षण झील का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध करता है। 

    सर्दियों में यह शानदार झील पूरी तरह से जम जाती है। इस दौरान पर्यटक झील को एक बडे़ विशाल नमक के जमाव के रूप में देख सकते हैं। हिमालय की इस झील की प्राकृतिक सुन्दरता पर दुनिया सम्मोहित है। इसका प्राकृतिक सौन्दर्य वैश्विक पर्यटकों को खींच लाता है।

    इस दिव्य-भव्य झील को उच्च घास का मैदान भी कहा जाता है। करीब 134 किलोमीटर लम्बी इस झील को हिमालय की बेमौसम झील कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो पांगोंग त्सो झील करीब 604 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुयी है।

   पांगोंग त्सो झील वस्तुत: प्रवासी पक्षियों का प्रजनन क्षेत्र एवं आशियाना है। गर्मियों के मौसम में बाल वाले हंस एवं ब्रााह्मणी बतख आदि इत्यादि दर्शनीय होते हैं। इनके अलावा विलुप्त प्रजाति के पक्षियों का कोलाहल एवं कलरव भी पांगोंग त्सो झील पर दिखता है।

    पांगोंग त्सो झील की सुन्दरता की दर्शनीयता के लिए पर्यटकों को लेह-लद्दाख की विस्तृत यात्रा करनी पडे़गी। पांगोंग त्सो झील एवं आसपास के इलाके में पर्यटक लद्दाख की लोक संस्कृति एवं स्थानीयता का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। 

   पांगोंग त्सो झील एवं आसपास का शांत एवं शीतल परिवेश पर्यटकों को रोमांचित कर देता है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक किसी स्वर्ग लोक में आ गये हों। सर्दियों में पांगोंग त्सो झील की यात्रा का आनन्द दोगुना हो जाता है। कारण चौतरफा बर्फ की शानदार चादर दिखती है। बर्फबारी का यह दृश्य मुग्ध करने वाला होता है।

   हिमालय की पर्वत मालाओं से घिरी पांगोंग त्सो झील एवं मखमली घास के मैदान पर्यटकों को एक शानदार सुखद स्पर्श का एहसास कराते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो पांगोंग त्सो झील को भारत की विशाल नमक झीलों में से एक माना जाता है।

   इतना ही नहीं, पांगोंग त्सो झील को दुनिया की सबसे ऊंची, सबसे लम्बी एवं सबसे गहरी झील माना जाना जाता है। सबसे दिलचस्प यह कि इस शानदार झील के जल की निकासी कहीं नहीं है। लेह-लद्दाख की यह अति दर्शनीय झील भारत से तिब्बत तक फैली है। इस रमणीय झील के सम्मोहन से बॉलीवुड भी नहीं बच सका।

  हिमालय की वादियों की पांगोंग त्सो झील एवंं आसपास असंख्य फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। खास यह कि इस शानदार झील में पर्वतीय बतख भी देखने को मिलती हैं। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता भी पांगोंग त्सो झील की विशेषता है।

  विशेषज्ञों की मानें तो विलुुप्त आैषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता पांगोंग त्सो झील की शान एवं शोभा है। बॉलीवुड का पसंदीदा इलाका होने के कारण पांगोंग त्सो झील की सुन्दरता कई फिल्मों में दर्शक देख चुके हैं। 

   इनमें खास तौर से दिल से, द फॉल, हीरो, थ्री इडियट्स, जब तक है जां, सनम रे, ना जाने कब आदि इत्यादि फिल्मों में पांगोंग त्सो झील का प्राकृतिक सौन्दर्य दिख चुका है।

   पांगोंग त्सो झील की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कुशोक बगुला रम्पोछे एयरपोर्ट लेह है। एयरपोर्ट से पांगोंग त्सो झील की दूरी करीब 142 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कालका जंक्शन एवं शिमला जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पांगोंग त्सो झील की यात्रा कर सकते हैं।
34.146490,77.481610

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