Thursday, 4 July 2019

पेंच राष्ट्रीय उद्यान: प्राकृतिक सुन्दरता

   पेंच राष्ट्रीय उद्यान को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। इस राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुन्दरता को प्रकृति का शानदार उपहार कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 

   भारत के मध्य प्रदेश का यह राष्ट्रीय उद्यान अति दर्शनीय एवं रोमांंचक है। मध्य प्रदेश के सिवनी एवं छिंंदवाड़ा का यह शानदार वन्य जीव अभयारण्य काफी कुछ खास है। हालांकि इस शानदार राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर अब इन्दिरा प्रियदर्शिनी राष्ट्रीय उद्यान कर दिया गया है।

   इसे मोगली लैण्ड के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। सिवनी एवंं छिंदवाड़ा के मिले जुले इलाके में स्थित पेंच राष्ट्रीय उद्यान का फैलाव करीब 292.83 वर्ग किलोमीटर में है। खास यह कि इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम पेंच नदी पर आधारित है। उद्यान के उत्तर दिशा में प्रवाहित नदी यहां की शान एवं शोभा है। 

   मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा क्षेत्र के इस राष्ट्रीय उद्यान को देश का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिजर्व होने का गौरव हासिल है। इसे वर्ष 1993 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। 

   खास यह सर्दियों में इस राष्ट्रीय उद्यान की शान एवं शोभा आैर भी अधिक बढ़ जाती है। कारण उद्यान चौतरफा हिमालयी पक्षियों से गुलजार हो जाता है। सर्दियों में हिमालयी पक्षियों की 210 से अधिक प्रजातियां इस सुरम्य उद्यान में बसेरा करती खास यह कि उद्यान दुर्लभ पक्षियों एवं जीव जन्तुओं से आबाद रहता है। 

   यह पक्षी सर्दियों में भोजन एवं प्रजनन के लिए यहां प्रवास करते हैं। खूबसूरत झीलें, ऊंचे सघन पेड़ एवं शानदार झुरमुट पेंच राष्ट्रीय उद्यान को काफी कुछ खास बना देते हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान में रंगबिरंगे पक्षियों का कलरव, शीतल एवं शांत हवा के झोके, सोंधी सुगंध वाली माटी पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देती है। 

    प्रकृति का अनन्त सागर पर्यटकों के रोम-रोम को प्रफुल्लित कर देता है। चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली भैंसा आदि इत्यादि से शोभायमान पेंच राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों के बीच बेहद पसंदीदा है। बाघ वंश खास तौर से पेंच की शान एवं शोभा हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सौ से अधिक बाघ वंश इस शानदार राष्ट्रीय उद्यान में की रौनक हैं। 

   खास यह कि देश में विलुप्त हो रहे गिद्ध पेंच राष्ट्रीय उद्यान में बहुलता से पाये जाते हैं। खास तौर से इस उद्यान में लाल धारी वाले एवं सफेद धारी वाले गिद्ध पाये जाते हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान में राज तोता एवं दूधराज भी मस्ती करते दिखते हैं। विशाल झीलों एवं झरनों वाला यह इलाका अति दर्शनीय है।

   विशेषज्ञों की मानें तो देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों की तुलना में पेंच राष्ट्रीय उद्यान कहीं बेहतरीन है। सतपुड़ा पहाड़ियों का यह इलाका आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित होने से वन्य जीवों एवं पर्यटकों के लिए किसी प्राणवायु से कम नहीं है। जड़ी बूटियां एवं घास की प्रचुरता इस राष्ट्रीय उद्यान को आैर भी अधिक सुन्दर बनाती हैं। 

   विशेषज्ञों की मानें तो इस राष्ट्रीय उद्यान में 1200 से अधिक पौधों की प्रजातियां पायी जाती हैं। मछलियों की 50 से अधिक प्रजातियां भी जल कोलाहल को बनाये रखती हैं। 
  इस राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, चीता, चीतल, काला हिरन, खरगोश, उड़ने वाली गिलहरी, सांभर, लोमड़ी, जंगली सुअर, साही, सियार, बाराहसिंगा, चारसिंगा एवं नीलगाय पेंच राष्ट्रीय उद्यान में स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं।

 
   बारिश के बाद पेंच राष्ट्रीय उद्यान की सुन्दरता कहीं अधिक बढ़ जाती है। कारण चौतरफा हरितिमा का साम्राज्य दिखता है। ऐसे में फोटोग्राफर्स के लिए पेंच राष्ट्रीय उद्यान किसी स्वर्ग की भांति होता है।

   यह वन्य जीव अभयारण्य खास तौर से जैव विविधिता के लिए जाना पहचाना जाता है।
   पेंच राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सोनेगांव नागपुर एयरपोेर्ट है।

   नागपुर एयरपोर्ट से पेंच राष्ट्रीय उद्यान की दूरी 86 किलोमीटर है। पर्यटक जबलपुर एयरपोर्ट से भी यात्रा कर सकते हैं। जबलपुर एयरपोर्ट से पेंच राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 171 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन छिंदवाड़ा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पेंच राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
22.053350,78.938140

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