डांडेली वन्य जीव अभयारण्य: हाथियों का आशियाना
डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को हाथियों का आशियाना कहा जाना चाहिए। जी हां, खास यह कि इस अभयारण्य में हाथियों की विशेष प्रजातियां भी संरक्षित हैं।
इसे पक्षियोंं का स्वर्ग भी माना जाता है। भारत के कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ जिला का यह शानदार अभयारण्य अद्भुत एवं विलक्षण है। करीब 866.41 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला डांडेली वन्य जीव अभयारण्य वस्तुत: दुर्लभ आैषधीय वनस्पतियों का उत्पादक क्षेत्र है।
इसे पक्षियोंं का स्वर्ग भी माना जाता है। भारत के कर्नाटक के उत्तरा कन्नड़ जिला का यह शानदार अभयारण्य अद्भुत एवं विलक्षण है। करीब 866.41 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला डांडेली वन्य जीव अभयारण्य वस्तुत: दुर्लभ आैषधीय वनस्पतियों का उत्पादक क्षेत्र है।
खास यह कि वर्ष 2006 में अंशी डांडेली टाइगर रिजर्व भी इसी क्षेत्र में घोेषित किया गया। वर्ष 2015 में डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को हाथी परियोजना क्षेत्र घोषित किया गया। विशेषज्ञों की मानें तो मैसूर हाथी रिजर्व के बाद कर्नाटक का यह दूसरा सबसे बड़ा हाथी अभयारण्य है।
हाथी एवं बाघ के लिए आरक्षित क्षेत्र होने के साथ ही अन्य वन्य जीवों की धमाचौकड़ी डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को बेहद रोमांचक बनाये रखती है। डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को बर्ड वॉचर्स का स्वर्ग भी कहा जाता है।
हाथी एवं बाघ के लिए आरक्षित क्षेत्र होने के साथ ही अन्य वन्य जीवों की धमाचौकड़ी डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को बेहद रोमांचक बनाये रखती है। डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को बर्ड वॉचर्स का स्वर्ग भी कहा जाता है।
कारण पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियां इस शानदार अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं। इनमें दुर्लभ एवं विलुप्त प्रजातियों के पक्षियों की दर्शनीयता भी है। सर्दियों का मौसम तो डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की रौनक में चार चांद लगा देता है। अप्रवासी पक्षियों का कलरव एवं कोलाहल पर्यटकों में एक खास रोमांच पैदा करता है।
विलुप्त काला तेंदुआ डांडेली वन्य जीव अभयारण्य का मुख्य आकर्षण है। हालांकि इसकी दर्शनीयता अति दुर्लभ रहती है। फिर भी काला तेंदुुआ डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की शान एवं शोभा है। हाथी के समुह स्वच्छंद विचरण करते दिख जायेंगे तो वहीं बाघ वंश की दहाड़ रोमांचित करती है।
भालू, हिरन, पैंगोलिन, विशाल मालाबार गिलहरी, सियार, भौंकने वाला हिरन, मोर, किंग कोबरा, मगरमच्छ, तेंदुआ, सुनहरा कठफोड़वा आदि जीव जंतु इस शानदार अभयारण्य में शोभित एवं संरक्षित हैं। खास यह कि डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की प्राकृतिक सुन्दरता तो देखते ही बनती है। यहां के मनोरम दृश्य पर्यटकों को लुभाते एवं रिझाते हैं। इस प्राकृतिक सौन्दर्य में पर्यटक खो जाते हैं।
डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की शान एवं शोभा सुरम्य नदियां, घाटियां-वादियां पर्यटको के दिलों में उतर जाती हैं। इठलाती झील एवं झरनों की श्रंखला एक यादगार बन जाती है। नदियों के शीतल प्रवाह में पर्यटक जलक्रीड़ा का आनन्द लेना नहीं भूलते। विशेषज्ञों की मानें तो डांडेली वन्य जीव अभयारण्य एक आदर्श हिल स्टेशन भी है।
आैषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता, उत्पादकता एवं अनुसंधान जैसी विशिष्टितायें डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की खासियत है। यहां के सदाबहार वन पर्यटकों को खास ऊर्जा से भर देते हैं।
पर्यटक खास तौर से आैषधीय वनस्पतियों, पौधों का जीवन दर्शन, जादुई जड़ी बूटियों की उपलब्धता, झाड़ियों की विशाल श्रंखला आदि इत्यादि डांडेली वन्य जीव अभयारण्य को काफी कुछ खास बना देती हैं।
डांडेली वन्य जीव अभयारण्य एवं आसपास आकर्षक एवं प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित पर्यटन स्थलों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान हैं। इनमें खास तौर से कावला गुफायेें, कुल्गी नेचर कैम्प, अंशी राष्ट्रीय उद्यान, सिन्थेरी रॉक, काली नदी, मल्लिकार्जुन मंदिर एवं सुपा बांध आदि इत्यादि हैं।
कावला गुफायें: कावला गुफायें एक आदर्श एवं ऐतिहासिक स्थान है। डांडेली वन्य जीव अभयारण्य से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित कावला गुफायें की स्थापत्य कला देखते ही बनती है। पर्यटकों को गुफाओं तक पहंुचने के लिए सघन वन क्षेत्र से गुजरना पड़ता है। इन गुफाओं को भगवान शिव का स्थान माना जाता है।
कुल्गी नेचर कैंप: कुल्गी नेचर कैंप वस्तुत: एक शानदार संग्रहालय है। कुल्गी नेचर कैंप डांडेली वन्य जीव अभयारण्य से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे प्राकृतिक व्याख्या केन्द्र के तौर पर देखा जाता है। इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण किंग कोबरा है।
अंशी राष्ट्रीय उद्यान: अंशी राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य आकर्षण पर्वत श्रंखला, गहरी घाटियां-वादियां एवं झील झरनें हैं।
सिन्थेरी रॉक: सिन्थेरी रॉक वस्तुत: यह एक विशाल शिलाखण्ड है। कनेरी नदी के किनारे स्थित इस शिलाखण्ड से प्रकृति के शानदार एवं सुन्दर नजारे दिखते हैं।
सिन्थेरी रॉक: सिन्थेरी रॉक वस्तुत: यह एक विशाल शिलाखण्ड है। कनेरी नदी के किनारे स्थित इस शिलाखण्ड से प्रकृति के शानदार एवं सुन्दर नजारे दिखते हैं।
काली नदी: काली नदी इस इलाके का मुख्य आकर्षण है। उत्तरा कन्नड़ जिला के एक गांव डिग्गी से उत्पन्न नदी की दर्शनीयता अति सुन्दर है। नदी के सफेद जल में रॉफ्टिंग का अपना एक अलग ही आनन्द है। पर्यटक यहां रॉफ्टिंग का भरपूर आनन्द लेते हैं।
श्री मल्लिकार्जुन मंदिर: श्री मल्लिकार्जुन मंदिर एक पौराणिक एवं धार्मिक स्थल है। यह भगवान शिव का स्थान है। गर्भगृह में नवरंग मंतप एवं कदंब शैली के गुम्बद हैं। यह स्थापत्य कला अति दर्शनीय है।
सुपा बांध: सुपा बांध स्थल एक अति दर्शनीय एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट है। सुपा बांध डांडेली से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। सुपा का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को रोमांचित कर देता है।
श्री मल्लिकार्जुन मंदिर: श्री मल्लिकार्जुन मंदिर एक पौराणिक एवं धार्मिक स्थल है। यह भगवान शिव का स्थान है। गर्भगृह में नवरंग मंतप एवं कदंब शैली के गुम्बद हैं। यह स्थापत्य कला अति दर्शनीय है।
सुपा बांध: सुपा बांध स्थल एक अति दर्शनीय एवं आदर्श पिकनिक स्पॉट है। सुपा बांध डांडेली से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। सुपा का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को रोमांचित कर देता है।
डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट डाबोलिन एयरपोर्ट गोवा है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोंकड़ जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी डांडेली वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा कर सकते हैं।
15.263500,74.619100
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