हुमायूं का मकबरा: शानदार वास्तुशिल्प
हुमायूं का मकबरा को वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य शैली का शानदार आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
जी हां, दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा की सुन्दरता का कहीं कोई जोड़ नहीं। यह मुगल वास्तुकला एवं स्थापत्य कला की एक सयंुक्त संरचना है। खास यह कि हुमायूं का मकबरा देश का पहला शाही मकबरा है। करीब 21.60 हेक्टेयर में फैले मकबरा की सुन्दरता देखते ही बनती है।
इसमें 16 वीं सदी के मुगल उद्यान के गुम्बदों की शानदार श्रंखला है। हुमायूं का मकबरा शहंशाह अकबर के संरक्षण में 1560 के दशक में बना था। नई दिल्ली के दीनापनाह अर्थात पुराने किला के निकट निजामुद्दीन पूर्व क्षेत्र में स्थित है। इस परिसर में मुख्य इमारत हुमायूं का मकबरा है। साथ ही परिसर में हुमायूं सहित कई मुगल शासकों की कब्रगाह हैं।
विलक्षण वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य शैली के कारण इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। विशेषज्ञों की मानें तो भारत में मुगल वास्तुकला की पहली संरचना है। इस मकबरा में चारबाग शैली को अपनाया गया। जिसको आधार बना कर ताजमहल का निर्माण किया गया था।
हुमायूं का यह मकबरा उनकी विधवा बेगम हमीदा बानो बेगम की इच्छा पर 1560 में बनाया गया था। इसके वास्तुकार इब्न मुबारक मिराक घियाथुद्दीन एवं उनके पिता मिराक घुइयाथुद्दीन थे। इन वास्तुशिल्पियों को अफगानिस्तान से बुलाया गया था। इस भव्य दिव्य इमारत को बनाने में करीब 8 वर्षों का समय लगा था।
खास यह कि चारबाग शैली का यह पहला उदाहरण बना। लाल बलुआ पत्थरों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया। मकबरा में हुमायूं की कब्रगाह के बगल में बेगम हमीदा की कब्र है। इसके अलावा मकबरा में कई अन्य मुगल शासकों की कब्रगाह हैं।
मकबरा के लिए इस स्थान का चयन यमुना नदी के किनारे हजरत निजामुद्दीन की दरगाह से निकटता को ध्यान में रख कर किया गया था। निजामुद्दीन दिल्ली प्रसिद्ध सूफी संत थे। मुगल शासक निजामुद्दीन का काफी सम्मान करते थे।
हुमायूं का मकबरा स्थापत्य शैली का अद्भुत उदाहरण है। स्थापत्य शैली की विलक्षणता एक नजर में ही यहां देखी जा सकती है। इस विशाल इमारत में करीब 16 मीटर ऊंचे दो मंजिला प्रवेश द्वार बने हैं। यह दक्षिण एवं पश्चिम में हैं। मुख्य इमारत में सितारे के समान एक छह किनारों वाला सितारा प्रवेश द्वार है।
मकबरा का निर्माण मुख्य तौर पर गारा-चूना जोड़ कर किया गया है। इसके उपर पच्चीकारी, फर्श की सतह, झरोखों की जालियों, द्वार चौखट एवं झज्जों में श्वेत संगमरमर का उपयोग किया गया है। मकबरा करीब 8 मीटर ऊचे मूल चबूतरा पर खड़ा है।
मकबरा में फारसी वास्तुकला का भी उपयोग दिखता है। आंतरिक बनावट में केन्द्रीय कक्ष सहित नौ कक्ष हैं। मुगल उद्यान चारबाग शैली में बने हैं। चारबाग शैली पर आधारित यह उद्यान दक्षिण एशिया के अपनी प्रकार का विशिष्ट उद्यान हैं। विशिष्टता के कारण हुमायूं का मकबरा पर्यटकों के बीच खास आकर्षण का केन्द्र रहता है।
इस मकबरा में सौ से अधिक कब्र हैं। अधिकांश कब्र पर नाम अंकित न होने से पहचान मुश्किल होने लगी है। इतना तो सुनिश्चित है कि यह सभी कब्र मुगल साम्राज्य के राज परिवार एवं उनके दरबारियों से ताल्लुक रखती हैं। मकबरा परिसर में चारबाग के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में 1590 का बना नाई का गुम्बद भी खास है। यह शाही नाई हुआ करता था।
हुमायूं के मकबरे की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते है।
28.592240,77.242670
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