फतेहपुर सिकरी : सुन्दर वास्तुकला
फतेहपुर सिकरी को वास्तुशिल्प का विलक्षण अलंकरण कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के निकट स्थित फतेहपुर सिकरी मुगल शासकों का एक सुन्दर एवं विहंगम आयाम है।
मुगल शासक अकबर ने इस शानदार-जानदार शहर फतेहपुर सिकरी को मुगल साम्राज्य की राजधानी के तौर पर विकसित एवं स्थापित किया था। मुगल शासक अकबर ने एक अभियान के बाद फतेहपुर सिकरी को छोड़ दिया था। इतना ही नहीं फतेहपुर सिकरी भारतीय संस्कृति एवं धार्मिकता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों की मानें तो फतेहपुर सिकरी की स्थापना 1571 में हुयी थी। इसका नाम सिकरी गांव के आधार पर रखा गया था।
फतेहपुर सिकरी को विजय का शहर के नाम से भी जाना-पहचाना जाता है। खास यह कि फतेहपुर सिकरी में आलीशान आवास एवं बाजार सहित बहुत कुछ विलक्षण है। इसकी वास्तुकला अद्भुत एवं विलक्षण है। करीब 1.90 किलोमीटर लम्बा एवं 1 किलोमीटर चौड़ाई वाला फतेहपुर सिकरी अपनी सुन्दरता के लिए देश विदेश में खास तौर से जाना जाता है। यह चौतरफा ऊंची दीवारों से घिरा इलाका है।
बाग-बगीचों एवं सुन्दर जलाशयों से युक्त फतेहपुर सिकरी मुगल शासकों का अति पसंदीदा स्थल था। फतेहपुर सिकरी का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से किया गया है। फतेहपुर सिकरी में दरवाजों की एक लम्बी श्रंखला है। इन दरवाजों को दिल्ली गेट, लाल गेट, आगरा गेट, बीरबल गेट, चंदनपाल गेट, ग्वालियर गेट, तेहर गेट, चोर गेट, अजमेरी गेट आदि हैं। रानी जोधा के लिए ग्रीष्मकालीन एवं सर्दी के लिए अलग अलग महल थे। बुलंद दरवाजा को फतेहपुर सिकरी की शान माना जाता है।
बुलंद दरवाजा : बुलंद दरवाजा मंडली मस्जिद के दक्षिणी इलाका में स्थित है। खास यह कि बुलंद दरवाजा बाहर से करीब 180 फुट ऊंचा है। यहां के शिलालेख शांति का संदेश देते हैं।
जामा मस्जिद : जामा मस्जिद फतेहपुर सिकरी के निर्माण अवधि की शायद पहली इमारत है। इसका आंगन बुलंद दरवाजा से ताल्लुक रखता है। गुम्बद एवं मेहराब आदि अति दर्शनीय हैं।
जामा मस्जिद : जामा मस्जिद फतेहपुर सिकरी के निर्माण अवधि की शायद पहली इमारत है। इसका आंगन बुलंद दरवाजा से ताल्लुक रखता है। गुम्बद एवं मेहराब आदि अति दर्शनीय हैं।
सलीम चिश्ती का मकबरा : सलीम चिश्ती का मकबरा बेहद दर्शनीय है। सफेद संगमरमर से बना मकबरा एक मंजिला है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे किसी संत की कब्रागाह हो। नक्काशीदार जाली एवं डिजाइन मुग्ध कर देती है। मकबरा के बायीं ओर शेख बदरुद्दीन चिश्ती के पुत्र इस्लाम खान का मकबरा है। यह लाल बलुआ पत्थरों से बना है।
दीवान-ए-आम : दीवान-ए-आम एक खास इमारत है। मुगल शासक इस दीवान-ए-आम में बैठ कर आम जनता की शिकायतों एवं दुख दर्द को सुनते थे। यहीं से निदान भी किया जाता था। यह एक बड़ा एवं खुला आकार का मण्डप वाला स्थान है। यह एक आयातकार संरचना है।
दीवान-ए-आम : दीवान-ए-आम एक खास इमारत है। मुगल शासक इस दीवान-ए-आम में बैठ कर आम जनता की शिकायतों एवं दुख दर्द को सुनते थे। यहीं से निदान भी किया जाता था। यह एक बड़ा एवं खुला आकार का मण्डप वाला स्थान है। यह एक आयातकार संरचना है।
दीवान-ए-खास : दीवान-ए-खास मुगल शासकों का परामर्श केन्द्र था। शासक इस स्थान पर खास व्यक्तित्वों से मुलाकात करते थे। यह एक चार छतरियों वाली एक साधारण इमारत है। फूलों की डिजाइन वाले नक्काशीदार खम्भों की सुन्दरता देखते ही बनती है। दीवान-ए-खास में मुगल शासक अकबर के लिए खास आसन बनाया गया था। यह आसन गोलाकार मंच की भांति है।
इबादत खान : इबादत खान वस्तुत एक पूजा घर है। इसका निर्माण 1575 में किया गया था।
अनुप तालाओ : अनुप तालाओ का निर्माण राजा अनूप सिंह सिकरवार ने कराया था। यह एक केन्द्रीय मंच सजावटी स्थान है। इसमें एक शानदार पूल एवं चार पुलों का निर्माण है। यह स्थान शाही एंक्लेव की कुुछ इमारतों में से एक है। इसे सपनों का घर भी कहा जाता है। इस इलाका में अकबर का निवास, पंच महल, आंख मिचौली एवं ज्योतिषी कोर्ट आदि बहुत कुछ है।
नौबतखाना : नौबतखाना को सूचना घर के तौर पर जाना जाता है। इसका आशय ड्रम हाउस के तौर पर है। इस स्थान का उपयोग मुगल शासक के आगमन की सूचना देने के लिए किया जाता था। यह शाही प्रवेश द्वार के निकट है।
बीरबल हाउस : बीरबल हाउस शासक अकबर के पसंदीदा हिन्दू मंत्री का आवास था। अकबर का यह मंत्री उनका खास एवं पसंदीदा था। यह शानदार इमारत का डिजाइन अति दर्शनीय है।
हिरण मीनार : हिरण मीनार एक गोलाकार टावर है। यह हाथी के आकार प्रकार का बना है। लिहाजा इसे हाथी टावर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह स्थान मुगल शासक अकबर के पसंदीदा स्थलों में से एक था।
इबादत खान : इबादत खान वस्तुत एक पूजा घर है। इसका निर्माण 1575 में किया गया था।
अनुप तालाओ : अनुप तालाओ का निर्माण राजा अनूप सिंह सिकरवार ने कराया था। यह एक केन्द्रीय मंच सजावटी स्थान है। इसमें एक शानदार पूल एवं चार पुलों का निर्माण है। यह स्थान शाही एंक्लेव की कुुछ इमारतों में से एक है। इसे सपनों का घर भी कहा जाता है। इस इलाका में अकबर का निवास, पंच महल, आंख मिचौली एवं ज्योतिषी कोर्ट आदि बहुत कुछ है।
नौबतखाना : नौबतखाना को सूचना घर के तौर पर जाना जाता है। इसका आशय ड्रम हाउस के तौर पर है। इस स्थान का उपयोग मुगल शासक के आगमन की सूचना देने के लिए किया जाता था। यह शाही प्रवेश द्वार के निकट है।
बीरबल हाउस : बीरबल हाउस शासक अकबर के पसंदीदा हिन्दू मंत्री का आवास था। अकबर का यह मंत्री उनका खास एवं पसंदीदा था। यह शानदार इमारत का डिजाइन अति दर्शनीय है।
हिरण मीनार : हिरण मीनार एक गोलाकार टावर है। यह हाथी के आकार प्रकार का बना है। लिहाजा इसे हाथी टावर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह स्थान मुगल शासक अकबर के पसंदीदा स्थलों में से एक था।
फतेहपुर सिकरी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। फतेहपुर सिकरी की दूरी आगरा से करीब 39 किलोमीटर है। निकटतम एयरपोर्ट आगरा है। एयरपोर्ट को खेरिया के नाम से जाना पहचाना जाता है। एयरपोर्ट से फतेहपुर सिकरी की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन फतेहपुर सिकरी है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी फतेहपुर सिकरी की यात्रा कर सकते हैं।
27.094529,77.667929
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