Wednesday, 4 July 2018

देवगिरि किला : शानदार वास्तुशिल्प

   देवगिरि किला को श्रेष्ठतम पौराणिक धरोहर कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। कारण असंख्य आक्रमण होने के बावजूद अभी तक किला अभेद्य रहा। 

    महाराष्ट्र के दौलताबाद स्थित इस विलक्षण किला की खूबियों की एक लम्बी श्रंखला है। वास्तु शिल्प की इस सुन्दर कलाकृति को दौलताबाद किला के तौर पर भी ख्याति हासिल है।
     विशेषज्ञों की मानें तो इस अभेद्य किला का निर्माण 11 वीं सदी में किया गया था। करीब दो सौ वर्षों तक ंिहन्दू शासकों ने यहां से शासन किया। भीलम राजा इस विलक्षण किला को अस्तित्व में लाये थे। राजा भीलम एक कुशल एवं शक्तिशाली शासक था। राजा भीलम ने होयसल, चोल एवं चालुक्य राज्यों पर आक्रमण कर विजय श्री हासिल की थी।

    देवगिरि किला की अभेद्य संरचना के कारण इसे भारत का सर्वाधिक सुरक्षित किला माना गया। कई शासकों एवं राजाओं ने इस किला पर आक्रमण किये लेकिन आक्रमणकारी असफल रहे। लिहाजा अभेद्य किला की संज्ञा से नवाजा गया। किला अविजित होने का श्रेय इसकी संरचना को जाता है।
     आैरंगाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर पहाड़ की चोटी पर स्थित इस किला में कई खूबियां हैं। दौलताबाद की दुर्जेय पहाड़ी पर स्थित यह किला एक राष्ट्रीय धरोहर या स्मारक है। करीब 190 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह किला शंख के आकार का है। किला की बाहरी दीवार एवं किला की आधार के बीच तीन भव्य दिवारों की श्रंखला है। इन पर असंख्य बुर्ज बने हैं। 

   विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीन देवगिरि नगरी इसी परकोटे पर बसी थी। सुरक्षा की दृष्टि से किला के आंतरिक क्षेत्र में कई सुरंग हैं। चट्टानों को काट कर बनायी गयीं यह सुरंग बेहद खतरनाक हैं। इस अंधेरा युक्त मार्ग को सुरंग के बजाय अंधेरी की संज्ञा दी गयी थी। इस अंधेरी में कई गड्ढ़े भी हैं जिससे दुश्मन धोखा कर गिर जायें। किला के प्रवेश द्वार पर आग की अंगीठियां भी हैं। जिससे आग की तपिश से दुश्मन को किला में प्रवेश से रोका जा सके। चांद मीनार, चीनी महल एवं बारादरी इस किला के मुख्य स्मारक हैं। 

   खास तौर से चांद मीनार की ऊंचाई 63 मीटर है। तीन मंजिला इस किला में एक भारी भरकम तोप है। इस तोप की मारक क्षमता 3.50 किलोमीटर है। इस तोप को चारों दिशा में घुमा कर चलाया जा सकता है। बताया जाता है कि चार मीनार का निर्माण अलाउद्दीन बहमनी शाह ने दौलताबाद फतह करने के उपलक्ष्य में बनवाया था।
     यह मीनार मुगल वास्तुकला की सुन्दरतम कृतियों में से एक है। मीनार के पीछे जामा मस्जिद है। जामा मस्जिद वास्तु शिल्प का सुन्दर आयाम है। इसी के निकट चीनी महल है। विशेषज्ञों की मानें तो राजा भीलम ने 1187 में स्वतंत्र राज्य स्थापित कर देवगिरि को राजधानी घोषित किया था। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने 1294 में किला पर चढ़ाई की थी। 
     विशेषज्ञों की मानें तो किला फतह के बाद 1327 में मोहम्मद बिन तुगलक ने देवगिरि को अपनी राजधानी बनाया। इसके बाद देवगिरि का नाम बदल कर दौलताबाद कर दिया। बाद में इसे मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया गया था। किला मुगल शासक आैरंगजेब की मृत्यु होने तक मुगल साम्राज्य के अधीन रहा। मुगल शासकों ने दौलताबाद को मुगल साम्राज्य की राजधानी बनाना चाहा लेकिन यह सब हो नहीं सका।
      देवगिरि किला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट आैरंगाबाद है। आैरंगाबाद देश के सभी प्रमुख हवाई अड्ड़ों से जुड़ा है। निकटतम रेलवे स्टेशन आैरंगाबाद है। आैरंगाबाद से दौलताबाद की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी दौलताबाद किला की यात्रा कर सकते हैं।
19.942715,75.213151

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