खजुराहो स्मारक : वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य का संगम
'खजुराहो" को वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य का अनुपम संगम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 'खजुराहो स्मारक समूह" वास्तविकता में हिन्दू धर्म एवं जैन धर्म का एक समन्वित स्मारक है।
भारतीय राज्य मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र-जनपद छतरपुर में स्थित 'खजुराहो स्मारक समूह" वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य शास्त्र का विलक्षण आयाम है। शायद यही कारण है कि 'खजुराहो स्मारक समूह" वैश्विक आकर्षण का केन्द्र है।
'खजुराहो स्मारक" मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्व इलाका झांसी से लगभग 175 किलोमीटर दूर स्थित है। सौन्दर्य शास्त्र का एक आयाम यह भी है कि 'खजुराहो स्मारक" की मूर्तियां हाव-भाव एवं आकार-प्रकार तथा भाव-भंगिमाओं से स्वत: आकर्षित करती हैं। हंसी-ठिठोली से लेकर प्रेम-प्रसंग एवं रतिक्रिया का दृश्यांकन विशेष है।
नगारा वास्तुकला आधारित संरचित 'खजुराहो स्मारक" की कलाकृतियां या मूर्ति शिल्प अधिसंख्य कामुकता को प्रदर्शित करता है। अधिसंख्य मूर्तियां नग्न अवस्था में संरचित है। वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य की विशिष्टताओं के कारण यूनेस्को ने 'खजुराहो स्मारक" को वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किया है। खजुराहो मध्य प्रदेश के प्राचीन शहरों में एक प्रमुख शहर है।
यह शहर मध्यकालीन मंदिरों एवं धरोहरों के लिए ख्याति रखता है। खजुराहो को प्राचीनकाल में खजूरपुरा एवं खजूर वाहिका भी कहा जाता था। खजुराहो में प्राचीन मंदिरों एवं धरोहरों की एक लम्बी श्रंखला है। 'खजुराहो स्मारक" को मध्यकाल का सर्वोत्कृष्ट स्मारक के तौर पर मान्यता है। खजुराहो को विश्व में मंदिरों का शहर भी कहा जाता है। प्रेम, अप्रतिम सौन्दर्य एवं सहवास के साक्षात प्रतिबिम्ब को देखने देश-दुनिया के पर्यटक 'खजुराहो स्मारक" निरन्तर आते रहते है।
कला एवं संस्कति को शिल्पियों ने बेहद शानदार तौर-तरीके से पत्थरों पर उकेरा। यह शिल्पांकन ही दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बना। खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है। खजुराहो वस्तुत: चन्देल साम्राज्य की प्रथम राजधानी रहा। चन्देल वंशज राजा चन्द्रवर्मन अनवरत कई युद्धों के विजेता रहे। राजा ने कलिंजर में विशाल-दिव्य-भव्य किला का निर्माण कराया। तालाब-उद्यान श्रंखला से आच्छादित खजुराहो में 85 अद्वितीय मंदिरों का निर्माण कराया।
राजा चन्द्रवर्मन एवं उनके उत्तराधिकारियों ने खजुराहो में मंदिरों का श्रंखलावद्ध निर्माण कराया। ब्रिाटिश इंजीनियर टी एस बर्ट ने खजुराहो के मंदिरों की खोज की थी। 'खजुराहो स्मारक" को उस वक्त पश्चिमी समूह कहा गया। यूनेस्को ने 'खजुराहो स्मारक" को 1986 में विश्व विरासत सूची में शामिल किया। 'खजुराहो स्मारक" क्षेत्र में लक्ष्मण मंदिर उच्च कोटि का मंदिर है। भगवान विष्णु की विलक्षण प्रतिमा के दर्शन यहां होते हैं। मंदिर के प्लेटफार्म पर चार सहायक वेदियां विद्यमान हैं।
'खजुराहो स्मारक" का अग्रभाग मूर्ति शिल्प से सुसज्जित है। मध्य खण्ड में प्रेम,वात्सल्य, आलिंगन एवं सहवास पर आधारित मूर्तियां हैं। मंदिर के सामने दो लघु वेदियां स्थापित हैं। इनमें एक वेदी देवी को एवं एक अन्य वराह देव को समर्पित है। 'खजुराहो स्मारक" अर्थात मंदिर की उत्पत्ति हिन्दू पौराणिक कथाओं को दर्शाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो शास्त्रों में खजुराहो का उल्लेख मिलता है। खजुराहो वह स्थान है, जहां भगवान शिव का विवाह सम्पन्न हुआ था। विशेषज्ञों की मानें तो 'खजुराहो स्मारक" क्षेत्र बीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। मौजूदा समय में दो दर्जन से अधिक मंदिरों की श्रंखला विद्यमान है। 'खजुराहो स्मारक" की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 'खजुराहो स्मारक" की दूरी करीब 620 किलोमीटर है तो वहीं छतरपुर शहर से करीब पचास किलोमीटर दूर है। खजुराहो हवाई अड्डा भी है लिहाजा हवाई जहाज से भी 'खजुराहो स्मारक" की यात्रा की जा सकती है। खजुराहो रेलवे स्टेशन भी है। लिहाजा रेल के माध्यम से भी खजुराहो की यात्रा कर सकते हैं।
24.831845,79.919855
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