Tuesday, 22 October 2019

सास बहू मंदिर : अद्भुत स्थापत्य कला

   सास बहू मंदिर की स्थापत्य कला को कला का इन्द्रधनुषी रंग कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, इस दिव्य-भव्य मंदिर का सौन्दर्य शास्त्र अद्भुत एवं विलक्षण है। 

  शायद इसी लिए सास बहू मंदिर की स्थापत्य कला वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है। भारत के मध्य प्रदेश के शहर ग्वालियर स्थित यह शानदार मंदिर खास ख्याति रखता है।

  ऐतिहासिक एवं पौराणिक शहर ग्वालियर का यह मंदिर अति प्राचीन है। शायद इसीलिए सास बहू मंदिर को पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर भी देखा जाता है।

   सास बहू मंदिर मूर्तिकला के अनुपम सौन्दर्य के लिए भी जाना जाता है। हिन्दुओं की आस्था का यह केन्द्र 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। ग्वालियर किला के निकट स्थित सास बहू मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप को समर्पित है। 

   प्राचीन शिलालेख एवं अन्य मान्यताओं के मुताबिक इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण कच्छपघात राजवंश के राजा महिपाल ने 1093 में कराया था। मान्यता है कि यह शानदार मंदिर सास एवं बहू को समर्पित है। 

   मान्यता है कि इस मंदिर को राजवंश की राज बहुओं ने दर्शनीय बनाने एवं विस्तार देने में अहम भूमिका का निर्वाह किया था। राजवंश की यह बहुएं सास एवं बहू थीं। 

  लिहाजा इसे सास बहू मंदिर के नाम से ख्याति मिली। मान्यता यह भी है कि सास बहू मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु स्वरूप को समर्पित है। आशय यह कि भगवान विष्णु के हजार भुजाओं वाले स्वरूप को समर्पित है। 

   लिहाजा इसे सहस्त्रबाहु मंदिर कहा गया। सहस्त्रबाहु कालान्तर में सास बहू में परिवर्तित हो गया। सास बहू मंदिर के गर्भगृह में भगवान पद्मनाभ की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठापित है। 

   इस शानदार मंदिर की मूर्ति कला एवं नक्काशी अद्भुत एवं विलक्षण है। यहां की मूर्तिकला पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है। इसे खूबसूरत मूर्ति कला की शानदार संरचना भी कह सकते हैं।

  मंदिर की नक्काशी एवं मूर्तिशिल्प देखते ही बनती है। खूबसूरती का यह बेजोड़ नमूना पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। 

   इस मंदिर के मध्य में एक वर्गाकार प्रकोष्ठ भी है। जिसके तीन ओर द्वार मण्डप हैं। चौथी दिशा में मंदिर का गर्भगृह स्थित है। 

   खास यह कि सास बहू मंदिर ग्वालियर का मुख्य पर्यटन आकर्षण है। यह अतुलनीय प्राचीन एवं ऐतिहासिक धरोहर भारत के मुख्य आकर्षण में से एक है।

   सास बहू मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट ग्वालियर है। एयरपोर्ट से सास बहू मंदिर की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ग्वालियर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सास बहू मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
26.214560,78.182710

Monday, 21 October 2019

जग निवास : धरती का स्वर्ग

    जग निवास को रोमांटिक अतिथि गृह कहा जाना चाहिए। जी हां, एक शानदार द्वीप का आकार-प्रकार रखने वाला जग निवास अद्भुत एवंं विलक्षण है।

  शायद इसी लिए इसे दुनिया का बेहद रोमांटिक पैलेस माना जाता है। भारत के राजस्थान के उदयपुर स्थित यह राजसी पैलेस कई विशिष्ट नाम से जाना पहचाना जाता है। 

  उदयपुर की पिछोला झील में स्थित यह शानदार राजसी आवास अब एक शानदार एवं सुन्दर अतिथि गृह के तौर पर संचालित है। हालांकि वर्तमान परिदृश्य में जग निवास को अब एक बेहतरीन होटल भी कह सकते हैं। इसे लेक पैलेस एवं जग मंदिर पैलेस आदि इत्यादि के नाम से भी ख्याति हासिल है। 

   करीब 83 कमरों एवं आलीशान सुइट्स वाला यह पैलेस एक भव्य-दिव्य होटल के तौर पर अतिथियों की सेवा एवं स्वागत करता है। नैसर्गिक परिवेश वाला जग निवास काफी कुछ विशिष्टताएं रखता है। 

   झील में जग निवास तक आने जाने के लिए सदैव मोटर वोट उपलब्ध रहती है। विशिष्ट्य आतिथ्य के कारण जग निवास देश दुनिया में विशेष ख्याति रखता है। 
   विशेषज्ञों की मानें तो जग निवास वैश्विक पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहता है। जग निवास को रोमांटिक पैलेस के खिताब से भी अलंकृत किया गया है। 

   विशेषज्ञों की मानें इस दिव्य-भव्य पैलेस का निर्माण 1743-1746 की अवधि में महाराणा जगत सिंह द्वितीय के नेतृत्व में किया गया था। मेवाड के शाही खानदान की परम्पराओं के अनुरूप इस शानदार पैलेेस का निर्माण किया गया था।

   बताते है कि इस शानदार पैलेस का निर्माण ग्रीष्मकालीन राजसी आवास के तौर पर किया गया था। प्रारम्भ में इसे जग निवास एवं जन निवास के तौर पर जाना पहचाना जाता था। पूर्वोन्मुख इस शानदार महल की विशिष्टताओं की एक लम्बी श्रंृखला है। 

   जग निवास से उगते हुए सूर्य के दर्शन एवं उपासना की जा सकती है। सूर्य का सौन्दर्य एवं लालित्य अति दर्शनीय एवं लुभावन होता है। वर्तमान में एक शानदार होटल के रूप में संचालित जग निवास में निरन्तर सौन्दर्यीकरण के विविध आयाम जोड़े गये। 

   यह शानदार लेक पैलेस दुनिया की विशिष्ट हस्तियों एवं अतिथियों का स्वागत सत्कार करने का गौरव भी रखता है। सफेद संगमरमर से बना जग निवास एक विशेष आकर्षण रखता है। विशेषज्ञों की मानें तो रानी एलिजाबेथ, ईरान केे शाह, नेपाल नरेश, अमेरिकन अतिथि जैकलीन कैनेडी आदि इत्यादि इस पैलेस की शोभा बढ़ा चुके हैं। 

   इतना ही नहीं, जग निवास हॉलीवुड एवं बॉलीवुड का पसंदीदा शूटिंग प्वाइंट भी है। असंख्य फिल्मों में जग निवास की खूबसूरती दिख चुकी है। पिछोला झील के मध्य में स्थित जग निवास की ख्याति अंतरराष्ट्रीय है। 

   जग निवास में खास महल, बड़ा महल, दिलाराम, सज्जन निवास एवं चन्द्रप्रकाश अति दर्शनीय हैं। जग निवास में आंगन, कमल के तालाब, आम के पेड़ोें की छांव में बना स्विमिंग पूल आदि इत्यादि पर्यटकों को भरपूर आनन्द प्रदान करते हैं। इसे विलासिता का आदर्श स्थान कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 

  करीब चार एकड़ में फैलेे जग निवास की सुन्दरता का कहीं कोई जोड़ नहीं है। इसकी कहीं कोई तुलना नहीं की जा सकती। वस्तुत: जग निवास निर्मल जलधारा में तैरता हुआ एक शानदार महल है। जग निवास एक स्वप्नलोक सा प्रतीत होता है।
  इसकी शान एवं शोभा अतुलनीय है। इसकी नक्काशी अति दर्शनीय एवं मुग्ध करने वाली है। इसे भारतीय राजवंश की एक शानदार एवं दुर्लभ धरोहर कहा जा सकता है। खास यह कि जग निवास को देख कर कोई भी मुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता। लिहाजा जग निवास को एक सम्मोहन भी कह सकते हैं।

   जग निवास की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट महाराणा प्रताप एयरपोर्ट उदयपुर है। एयरपोर्ट से जग निवास की दूरी करीब 20 किलोेमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन उदयपुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी उदयपुर की यात्रा कर जग निवास की शान एवं सुन्दरता का अवलोकन कर आनन्दित हो सकते हैं।
24.578270,73.692990

Sunday, 6 October 2019

सुजानपुर किला : सुन्दर स्थापत्य कला

   सुजानपुर किला की भव्यता-दिव्यता एवं सुन्दरता की कोई तुलना नहीं की जा सकती। खास यह कि सुजानपुर किला कलात्मकता की सुन्दर तस्वीर पेश करता है। 

   शायद इसी लिए सुजानपुर किला को विलक्षण एवं अद्भुत माना जाता है। इसकी स्थापत्य कला अति दर्शनीय है। भारत के हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर का यह शानदार एक पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर होने के साथ ही धार्मिक स्थल भी है।

   खास यह है कि सुजानपुर किला हमीरपुर के अति सुन्दर भवनों-इमारतों में से एक है। वस्तुत: यह दिव्य-भव्य किला कांगड़ा-हमीरपुर रियासत की शानदार संरचना है। इस राष्ट्रीय धरोहर की दर्शनीयता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।

  कांगड़ा पेंटिग्स इस किला को आैर भी अधिक सुन्दर, मोहक एवं शानदार बना देती हैं। सुजानपुर किला का निर्माण कांगड़ा के शासक राजा अभय सिंह ने 1758 में किया था। इस शानदार किला में राजसी वैभव के सभी संसाधन उपलब्ध थे। 

   खास यह कि यह किला राजसी वैभव का शानदार अलंकरण होने के साथ ही दिव्यता-भव्यता का भी गौरव रखता है। व्यास नदी के तट पर विद्यमान सुजानपुर किला अपनी विशालता के लिए जाना पहचाना जाता है।

    राजसी वैभव का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि सुजानपुर किला में होली का उत्सव बेहद अनुपम एवं शानदार होता है। किला के चौगान मैदान में होली का उत्सव राष्ट्रीयता को बयां करता है। 

    इस किला को कटोच वंश की धरोहर के तौर पर देखा जाता है। इस शानदार महल में 12 भव्य दरवाजे थे। इस कारण से इस राजमहल को बारादरी के नाम सेे भी जाना पहचाना गया।

   बताते हैं कि शासक ने राजाओं के नाम से इन 12 दरवाजों का निर्माण कराया था। भले ही यह राजसी किला अब काफी कुछ खण्डहर में तब्दील हो चुका हो लेकिन पौराणिकता ऐतिहासिकता को बयां करता है। 

   हालात यह कि किला का यह खण्डहर अभी भी राजसी वैभव एवंं ठाठ का एहसास करा देता है। इसे सुजानपुर टीहरा किला के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।

   सुजानपुर किला का स्वर्णिम काल काफी कुछ बयां करता है। इस किला में धार्मिक स्थानों की भी एक लम्बी श्रंंृखला विद्यमान है।

  इनमें खास तौर से गौरी शंकर का मंदिर है। कटोच वंश की कुल देवी का मंदिर भी है। इनके अलावा सुजानपुर किला में नरबदेश्वर मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर एवं अन्य देव स्थान भी हैं। 

  सुजानपुर किला की विशिष्टता को देखते हुए इसे हिमाचल प्रदेश की पौराणिक धरोहर कहना चाहिए।
सुजानपुर किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।

  निकटतम एयरपोर्ट गग्गल एयरपोर्ट कांगड़ा है। गग्गल एयरपोर्ट से सुजानपुर किला की दूरी करीब 108 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऊना जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से सुजानपुर किला की दूरी करीब 104 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सुजानपुर किला की यात्रा कर सकते हैं।
31.832900,76.498600

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